पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष ने नई दिल्ली में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद के दूसरे संस्करण की संयुक्त अध्यक्षता की।
प्रमुख बिंदु
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता सहयोग: दोनों देशों ने समुद्री गश्ती विमान का उपयोग करते हुए सहयोगात्मक समुद्री क्षेत्र जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने और जलमग्न क्षेत्र जागरूकता को बढ़ाने के अवसर खोजने पर सहमति व्यक्त की।
- संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप: दोनों पक्षों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अंतिम रूप देने के प्रयासों पर चर्चा की।
- प्रक्रियात्मक अंतःक्रियाशीलता: 2020 के परस्पर लॉजिस्टिक समर्थन व्यवस्था के आधार पर अभ्यास और अभियानों के लिए प्रक्रियात्मक अंतःक्रियाशीलता को बढ़ाने की व्यवस्थाओं की खोज करने पर सहमति बनी।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग: मंत्रियों ने घोषणा की कि भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा सामग्री एवं रक्षा सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) विकसित करना प्रारंभ करेंगे।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- संबंधों का उन्नयन: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2009 में ‘रणनीतिक साझेदारी’ से 2020 में ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ तक अपने संबंधों को उन्नत किया।
- द्विपक्षीय तंत्र: 2+2 रक्षा और विदेश मंत्रियों का संवाद, संयुक्त व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री आयोग, रक्षा नीति वार्ता, ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा परिषद, ऊर्जा संवाद, विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह आदि।
- द्विपक्षीय व्यापार: वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $24.1 अरब तक पहुँचा। भारत का निर्यात $8.58 अरब और आयात $15.52 अरब रहा।
- भारत ऑस्ट्रेलिया का 8वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जबकि ऑस्ट्रेलिया भारत का 14वाँ।
- CECA वार्ता: व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर वार्ता जारी है।
- रक्षा और सुरक्षा: ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद’ (QUAD) एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है जिसमें अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं।
- नौसैनिक सहयोग: 2021 में दोनों नौसेनाओं ने ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया नौसेना से नौसेना संबंध हेतु संयुक्त मार्गदर्शन’ दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए।
- द्विपक्षीय अभ्यास: 2020 में ऑस्ट्रेलिया ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया।
- AUSINDEX: भारतीय नौसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियन नौसेना के बीच नौसैनिक अभ्यास।
- पिच ब्लैक अभ्यास: भारतीय वायुसेना ने 2018 में डार्विन में पिच ब्लैक अभ्यास में भाग लिया।
- 2020 की व्यवस्थाएँ: परस्पर लॉजिस्टिक समर्थन व्यवस्था और रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन व्यवस्था ने जटिल सैन्य संलग्नता एवं क्षेत्रीय आपदाओं के प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया को सक्षम बनाया।
- महत्वपूर्ण खनिज एवं प्रौद्योगिकी : ऑस्ट्रेलिया-भारत महत्वपूर्ण खनिज निवेश साझेदारी पर वर्ष 2022 में हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत वर्ष 2023 के अंत में ऑस्ट्रेलिया-भारत महत्वपूर्ण खनिज अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई।
- इस केंद्र का उद्देश्य सतत खनन और प्रसंस्करण में नवाचार को प्रोत्साहन देना है, जिसके लिए सहयोगात्मक अनुसंधान एवं छात्रवृत्तियों हेतु सरकार द्वारा 5 मिलियन डॉलर की स्वीकृत निधि प्रदान की गई है।
- प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी : वर्ष 2023 में ऑस्ट्रेलिया और भारत ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते (MMPA) पर सहमति व्यक्त की।
- यह एक द्विपक्षीय ढांचा है, जो दोनों देशों के बीच प्रवासन और गतिशीलता को प्रोत्साहित करता है तथा अवैध एवं अनियमित प्रवासन से संबंधित मुद्दों का समाधान करता है।
- ऑस्ट्रेलिया की भारत के साथ आर्थिक संलग्नता के लिए नया रोडमैप : ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2025 में यह रोडमैप जारी किया, जिसमें रक्षा, खेल, संस्कृति, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी सहित लगभग 50 लक्षित अवसरों की पहचान की गई है।
- स्वच्छ ऊर्जा :ऑस्ट्रेलिया की नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता का उपयोग भारत के सतत विकास लक्ष्यों को समर्थन देने हेतु किया जा रहा है।
- इसके अंतर्गत वर्ष 2025 में भारत-ऑस्ट्रेलिया रूफटॉप सोलर प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य 2,000 महिलाओं और युवाओं को सौर तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित करना है।
- शिक्षा एवं कौशल : ज्ञान आदान-प्रदान और कार्यबल विकास के लिए शैक्षणिक साझेदारियों तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जा रहा है।
- कृषि व्यवसाय : भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने तथा खाद्य सुरक्षा में सुधार हेतु कृषि व्यापार का विस्तार किया जा रहा है।
- पर्यटन : सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन देने तथा वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाने के माध्यम से जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ किया जा रहा है।
भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया का महत्व
- इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक साझेदार: ऑस्ट्रेलिया मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
- महत्वपूर्ण खनिज एवं ऊर्जा स्रोत: ऑस्ट्रेलिया लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व, कोयला और एलएनजी की आपूर्ति करता है।
- व्यापार एवं आर्थिक साझेदार: भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022) के अंतर्गत व्यापार विस्तार हो रहा है।
- शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र: ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए प्रमुख गंतव्य है।
- भूराजनीतिक अभिसरण: QUAD, IORA, EAS आदि मंचों में सहयोग से भारत को चीन के प्रभाव का संतुलन बनाने में सहायता मिलती है।
चिंताएँ
- व्यापार असंतुलन: भारत का निर्यात सीमित है जबकि ऑस्ट्रेलिया का संसाधन-प्रधान निर्यात अधिक है।
- भारतीय प्रवासी एवं सुरक्षा चिंताएँ: भारतीय छात्रों से संबंधित घटनाएँ कभी-कभी चिंता उत्पन्न करती हैं।
- वीज़ा एवं कौशल मान्यता समस्याएँ: कार्य वीज़ा और कौशल की पारस्परिक मान्यता में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- कृषि बाजार पहुँच: ऑस्ट्रेलिया के कठोर मानकों के कारण भारत को कृषि उत्पाद निर्यात में कठिनाई होती है।
- रक्षा तकनीकी सहयोग में धीमी प्रगति: अभ्यास सुदृढ़ हैं, परंतु रक्षा निर्माण और संयुक्त अनुसंधान में सहयोग सीमित है।
आगे की राह
- रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग गहन करना: समुद्री सुरक्षा, खुफिया साझाकरण, संयुक्त रक्षा उत्पादन और QUAD आधारित पहलों को सुदृढ़ करना।
- CECA को शीघ्रता से पूरा करना एवं व्यापार विविधीकरण: वस्तुओं, सेवाओं, महत्वपूर्ण खनिजों और डिजिटल व्यापार में विविधता लाना।
- महत्वपूर्ण खनिज एवं स्वच्छ ऊर्जा संबंध सुदृढ़ करना: लिथियम, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना और हरित हाइड्रोजन व नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर सहयोग करना।
स्रोत: IE
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